Friday, September 22, 2017
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कानाबाती -कानाबाती- कुर्रर्ररररर

Monthly Archives: August 2013

जो कि सुना था मैंने

जो कि सुना था मैंने आंधीया मुझे ले गई झोंको ने क्यूं कुछ न कहा क्या रिश्ता है उस शहर से मेरा कैसे मैं कर दूं बयां वहां सुकून का झोंका बड़ा अच्छा था चाहे घर मेरा वहां अभी तक कच्चा था मेरे अपनो ने जो घोंपा था छुरा वो भी सच्चा था तूफानों से जूझने का मेरा हुनर भी ... Read More »

ओ प्रहरी

(मेरे अपने दामाद सैन्य अधिकारी देवेन्द्र को सादर सर्मिपत) ओ प्रहरी तुम जगते हो सरहद पर तभी तो मैं सो पाती हूं सपनो की चादर ओढ कर इत्मीनान के साथ तुम नहीं मनाते तीज तभी तो झूलती हूं मैं सावन में झूले चन्दन की पटड़ी पर रेशम की डोरी के साथ तुम नहीं पहनते रंगीन तभी तो मैं रहती हूं ... Read More »

ए री मोलकी

आज गांव जल बेहड़ा की आबोहवा बदली-बदली सी हैं सारे गांव में चर्चा हैं रूल्दू जाट का छोरा राममेहर मोल की बहु ल्याया सै। इसी बात को लेकर गांव में हंसीठठ्ठा व्यंग्य और कहीं-कहीं संजीदा बाते हो रही हैं। मतेरी चमारिन गांव में पानी की टून्टी पर बोल रही थी कि रूल्दू जाट की बहु लक्ष्मी ने मोल की बहु ... Read More »