Friday, September 22, 2017
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कानाबाती -कानाबाती- कुर्रर्ररररर

Category Archives: जो मन आया

फेसबुक वाले भाई मित्रो सुनो

हरी बत्ती देख कर चैट पर चले आने वाले मित्र भाईयो -निवेदन है कि जरूरी नही कि मैं हर वक्त चैट पर उपल्बध ही होती हूं ।या हरदम वहां मैं ही हूं अनेक बार घर का कोई अन्य सदस्य या मेरी assistent भी हो सकती है। computer on होते ही automaticaly -fb and other social networking accounts on हो जाते ... Read More »

पूरा श्लोक व भावार्थ यूं है मेरे प्रिय नारे का

पूरा श्लोक व भावार्थ यूं है मेरे प्रिय नारे का सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः | येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ||६|| Truth alone triumphs; not falsehood. Through truth the divine path is spread out by which the sages whose desires have been completely fulfilled, reach where that supreme treasure of Truth resides.[4] Read More »

ये व्यवस्था उन्हीं को बदल देती है

उन्हे देर से समझ आ पाती है कि कैसे ये सब हो गया ,कम से कम भाषणों से सत्ता मिल तो जाती है पर व्यवस्था नहीं बदलती ,सत्ता के मखमली अहसास के आन्नद में उदेश्य तो घास चरने चला जाता है। इसके लिए तो बनी बनाई सत्ता त्याग करने वाला जिगरा चाहिए- कठोर राजनैतिक ईच्छा से व्यवस्था बदल देने वाले ... Read More »

भाई लोगो सियासत में छुटभैयों की दुकानदारी राजनेताओं की गलतियो एवं असुरक्षा पर चल निकलती है

भाई लोगो सियासत में छुटभैयों की दुकानदारी राजनेताओं की गलतियो एवं असुरक्षा पर चल निकलती है । जरा सी भनक लग जाऐ या गलती का कोई महीन सुराग मिल जाऐ तो सही- वहीं परजीवी की तरह पनपने लगते है।नई दिल्ली में इनकी भरमार है -trap लगाने का थोक में धन्धा करते है- कभी honey trap तो कभी money trap और ... Read More »

क्या आप जानते हैं महीनों के नाम कैसे पड़े ?

महीने के नामों को तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि महीनों के यह नाम कैसे पड़े एवं किसने इनका नामकरण किया। नहीं न! तो जानिए…… जनवरी : रोमन देवता ‘जेनस’ के नाम पर वर्ष के पहले महीने जनवरी का नामकरण हुआ। मान्यता है कि जेनस के दो चेहरे हैं। एक से वह आगे तथा ... Read More »

आदरणीय भारतीय महिला मित्रो हम सब मिल कर इतिहास बना सकती है

हम 49 प्रतिशत भारतीय महिलाऐं भारतीय मीडीया में लगभग हाशिए पर हैं अकसर rape victims ,crime victims ,film stars celebrities,sometimes political women की खबरों के अतिरिक्त बाकी महिलाऐं यदा कदा ही दिखाई देती हैं। electronic मीडीया बहुत ही सशक्त माध्यम है जो छविया घड़ने व जनमत बनाने में बहुत प्रभावी होता है। इतनी शिक्षा ,दक्षता व उपलब्ध अवसरो के वावजूद ... Read More »

आज से बीस पच्चीस साल पहले

आज से बीस पच्चीस साल पहले तक केवल दो प्रकर की महिलाऐं ही कामकाजी जीवन शैली अपना रही थी – एक तो वे जो बहुत ज़रूरतमंद थी और परिवार कि आजीविका उनके सिर पर थी और दूसरी वें जो जागरूक थी और अपना जीवन अपने ढ़गं से, अपनी शर्तो पर ,व अपनी पहचान के साथ जीना चहती थी दोनो ही ... Read More »

आज की हवा

आज की हवा में व्यक्ति का व्यक्तिगत प्रधानता लिये है। मैं और मेरा अधिकार यही सर्वोपरि है। निजता की स्वतन्त्रता का अभ्यास घर घर पहुंच गया है।सब के लिऐ निजी कमरे ,निजी कार का प्रावधान प्राथमिक आवश्यकताओं का आकार ले गया है—- Read More »

स्वजातिय सगंठन की सक्रियता के मेरे अनुभव यूं रहे

किसी जातीय संगठन का अध्यक्ष हो कर विकासवाद की विारधारा को ले कर कार्य करने का मतलब है जैसे – अन्धों को आईने बेचना ——– गन्जो को कन्घें पकड़ना ——- या फिर जैसे अन्धेरे कुऐं के मे कीचड़ मे सने कूदते मेढको को रौशनी का पता बताना ——– अगर कोई साहस करके कूद भी जाऐ कि मैं उन्हे खीचं लाउगा ... Read More »